छत्तीसगढ़

शहीद की मां बेटे की आदमकद प्रतिमा बनवाकर आज भी कर रही प्यार-दुलार …

जशपुर । मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर जवानों की शहादत के किस्से इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों से भरे पड़ें हैं। इनकी वीरता, पराक्रम और जांबाजी की रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानियां देश भक्ति का जज्ब़ा पैदा करतीं हैं। news-forum.in वीर सपूतों की माताओं को सलाम करता है। जिन्होंने देश की आन-बान और शान के लिए अपने कलेजे के टुकड़े को सरहद पर भेजा और आज हम अपने घरों पर सुरक्षित हैं। news-forum.in आपके लिए ला रहा है ऐसी ही एक मां की कहानी जो अपने बेटे का आज भी उसी तरह ख्याल रखती है जैसा कि उसके जीवित रहने पर प्यार-दुलार करती थी। यह कहानी है छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहूल्य जिला जशपुर के वीर सपूत के मां साफियामा टोप्पो की …

 

आदिवासी बाहुल्य जिला जशपुर के अन्तिम छोर में ओडिशा की सीमा पर बसा गांव पेरवांरा, जहां शहीद बसील टोप्पो का घर है। यहां उसके माता-पिता अपने बेटे की यादों के सहारे रहते हैं। शहीद बसील वर्ष 2011 में बस्तर के जिला पुलिस बल में तैनात था। बसील की पोस्टिंग बीजापुर के भद्रकाली पुलिस थाने में की गई थी। अगस्त 2011 में नक्सलियों ने बारूदी सुरंग से इनके वाहन को उड़ा दिया था और इनपर अंधाधुंध फायरिंग की थी। इस नक्सली हमले में बसील टोप्पो शहीद हो गए थे। इस घटना के बाद शहीद की मां साफियामा टोप्पो का बुरा हाल था। बार-बार वह अपने बेटे को याद कर रोती रहती थी। बेटे के अंतिम संस्कार के बाद मां की ममता इस कदर हावी थी कि उसने अपने बेटे बसील टोप्पो के शहादत को जीवित रखने आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की बात शहीद के पिता से कही। जिसके बाद ओडिशा व कोलकाता के कलाकारों ने मिलकर शहीद बसील टोप्पो की हूबहू आदमकद प्रतिमा तैयार कर गांव में स्थापित कर दिया।

शहीद की मां साफियामा टोप्पो उसी प्यार और दुलार से अपने बेटे के आदमकद प्रतिमा पर ममता लुटाने लगी। मां की ममता ऐसी है जैसे कि आज भी उसका बेटा जिंदा है और वह अपने बेटे को प्यार कर रही है। वह रोज अपने सुबह-शाम अपने बेटे के पास रहती है। उससे बातें करती है और उसके जन्मदिन पर पसंद का खाना भी बनाती है। यह क्रम प्रतिमा स्थापना के बाद लगभग 9 वर्षों से अनवरत जारी है। मां की ममता देख गांव वासियों के आंखों से आंसुओं की धार फूट पड़ती है। मां को पता है कि उसका बेटा अब कभी वापस नहीं आएगा, इसके बावजूद मां की ममता अपने बेटे को प्यार-दुलार कर रही है। स्वतंत्रता दिवस पर ऐसी मातृशक्तियों के जज्बे को सलाम। जिन्होंने शहादत के बाद भी अपने बच्चों के प्रति अपनी ममता को बरकरार रखे हुए है।

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