मेरी रचना

छत्तीसगढ़ महतारी …

©महेतरू मधुकर, पचपेडी़, बिलासपुर, छत्तीसगढ़

 

ऋषि-मुनी तोर नाव जपय,

मधुकर तोर महिमा गावय।

सोना बरसे तोर दुआरी,

तोला बंदव वो,

मोर छत्तीसगढ़ महतारी।

तोला सुमरंव वो,

मोर छत्तीसगढ़ महतारी……

 

तोर कोरा म खान रतन के,

जन-जन के तयं भाग संवारे।

सरगुजा तिलक कस सोहे,

इन्द्रावती चरण तोर पखारे।।

सीपत भिलाई जगमग करे,

करमा ददरिया रचे बसे।

पंथी नाचे सब संगवारी………

 

मल्हार सिरपुर इतिहास कहै,

शिवरीनरायण कथा सुनाये।

धन-धान्य से भरे हे ए भुईंया,

धान के कटोरा तयं ह कहाये।।

गंगा कस निर्मल महानदी,

बखान होवय जम्मो कती,

माटी के हे महिमा भारी………

 

भारत देश के हृदय स्थल,

छत्तीसगढ़ हर ए सुखदाई।

हाट तिहार मनखे ल जोरे,

सुहाये मेला अऊ मड़ाई।।

बड पावन हेवय सोनाखान,

सत के चिन्हारी गिरौदधाम,

पूजय सब नर नारी………….

 

 

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