मेरी रचना

कोरोना …

©डॉ. संतराम आर्य, नई दिल्ली, वरिष्ठ साहित्यकार

 

कोरोना – कोरोना

जबरन आया आज कोरोना

मत करो, मत करो, मत, करोना

जबरन कर दिया घर में रहना

बड़े देशों को कर दिया बोना

यह तो पड़ेगा सब को सहना——-

 

सभी मंदिरों पर ताले जड़े हैं

अल्लाह, गॉड भी बंद पड़े हैं

इस जंग में सभी साथ खड़े हैं

दु:खी कोई भी कभी मत होना

कोरोना कोरोना कोरोना कोरोना——

 

सभी जंगों में हथियार चले हैं

इस जंग से डाक्टर परिवार भिड़े हैं

नहीं जात पात के कोई धड़े हैं

तन मन धन से सेवा में खड़े हैं

कभी मत रोना कभी मत रोना——-

 

प्रशासन जीवन साधन करेंगे

देश, आदेश का पालन करेंगे

हिन्दू मुस्लिम सिक्ख ईसाई कहेंगे

पाबंदी से अपने घर में रहेंगे

कभी कोई भी हिम्मत मत खोना——

 

जो जैसा करते हैं वैसा भरते हैं

और दोष दूसरों पर मढ़ते हैं

धर्म की व्याख्या गलत करते हैं

अन्ध भक्त बन कर मरते हैं

विद्वानों का सच है यह कहना——

 

ये सीख और बातें नई नहीं हैं

सामाजिक गठन के लिए कही हैं

लाकडाउन की विधि सही है

संतराम से पहले भी कही गई हैं

विष की पौध कभी मत बोना

कोरोना कोरोना कोविद कोरोना——

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