छत्तीसगढ़

देशी एम्बुलेंस : महतारी एक्सप्रेस के रहते गर्भवती को लेबर पेन होने पर खाट में लिटाकर परिजनों ने 5 किलोमीटर का रास्ता पैदल किया तय

पाली ब्लाक के ग्राम सोनईपुर का मामला, पथरीले रास्ते की वजह से नहीं पहुंचती एम्बुलेंस

कोरबा । छत्तीसगढ़ का बिजली उत्पादक जिला कोरबा। यह जिला बिजली व कोयला उत्पाद को लेकर हमेशा नंबर एक पर रहा है लेकिन जिले के विकासखंड स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर फिसड्‌डी साबित हो रहे हैं। राजस्व में बड़ा योगदान देने के बाद भी जिले के विकासखंड को अच्छी सड़कें भी नसीब नहीं हो पातीं। नतीजा जान जोखिम में डालकर मीलों तक पद यात्रा करना। यहां विकास अब तक पहुंचा ही नहीं। यहां के बाशिंदे मीलों चलकर खुद ‘विकास’ तक पहुंचने की जद्दोजहद कर रहे हैं।

 

बीच रास्ते बच्चे का जन्म

कोरबा जिले का पाली ब्लॉक अंतर्गत आदिवासी बाहुल्य गांव सुनाईपुर का पहुंच मार्ग खराब होने की वजह से यहां एम्बुलेंस नहीं पहुंच पाती। गुरुवार की सुबह यहां रहने वाले रघुनाथ धनुहार की पत्नी सुशीला बाई को लेबर पेन होने पर खाट में उठाकर पथरीले रास्तों पर परिजनों को 5 किलोमीटर की लंबी पद यात्रा करनी पड़ी। परिजन 5 किलोमीटर का पथरीला रास्ता पैदल तय किए ही थे कि बीच रास्ते में ही गर्भवती ने एक स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दिया।

एम्बुलेंस तक लाने 5 किमी का सफर

ग्राम सोनईपुर में निवासरत आदिवासी महिला को प्रसव होने के बाद गंभीर हालत होने पर महतारी एक्सप्रेस 102 से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन कोई संपर्क नहीं हो पाया। किसी तरह महतारी एक्सप्रेस बुलाई गई तो एम्बुलेंस पोटपानी पहुंच तो गई, लेकिन पोटापानी से सोनईपुर तक जाने का रास्ता ऐसा नहीं जिस पर चारपहिया गुजर सके। लिहाजा, सुशीला बाई को उसके पति ने एक अन्य ग्रामीण की मदद से खाट पर लेटाकर किसी तरह पोटापानी तक पहुंचाया। यहां खड़ी महतारी एक्सप्रेस से सुशीला बाई को पाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया।

बीच रास्ते हो जाती है मौत

गांव में जब भी कोई बीमार होता है, तो लोग इसी तरह खाट की एम्बुलेंस बनाकर मरीज को अस्पताल पहुंचाते हैं। कई बार उपचार में देरी की वजह से रास्ते में ही मरीज दम तोड़ देते हैं। यहां रहने वाले ग्रमीणों को सड़क जैसी आधारभूत संरचना के अभाव में ऐसी दिक्कतें आए दिन झेलनी पड़ती है। प्रसव पीड़ा से तड़पती गर्भवतियों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने की जरूरत होती है, लेकिन सड़क के अभाव में महिलाओं के लिए शुरू की गई महतारी एक्सप्रेस सेवा भी अनुपयोगी साबित होती है।

विकास के दावे फेल

स्वास्थ्य सुविधा की बेहतरी को लेकर शासन भले ही लाख दावे कर रही हो, पर आज भी सूबे के कई गांव ऐसे हैं, जहां तक एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती। पोटापानी व सोनईपुर के बीच के पांच किलोमीटर की सड़क वर्षो बाद भी दुरुस्त नहीं हो सका है। पहाड़ पर बसे सोनईपुर तक पहुंचने का एकमात्र साधन पदयात्रा है।

जननी योजना का लाभ नहीं

प्रसूता व नवजात को खतरे से बचाने के लिए शासन की ओर से सरकारी अस्पतालों में जननी सुरक्षा योजना का संचालन किया जा रहा है। प्रसूता का सहज ढंग से अस्पतालों में आकर प्रसव कराने वाली मितानीन व आंगनबाड़ी कार्याकर्ताओं के लिए प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है। इतना ही नहीं, प्रसूतियों को अस्पताल तक लाने में शासन ने महतारी एक्सप्रेस का संचालन शुरू किया है। बावजूद इसके गांवों तक पहुंचने का मार्ग दुरुस्त नहीं होने के कारण इन सुविधाओं से कई क्षेत्र के लोग वंचित हैं।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close