देश-विदेश

बिहार के ‘द माउंटेन मैन’ नाम से विख्यात दशरथ मांझी का परिवार आर्थिक तंगी से दाने-दाने को मोहताज

गया। ‘द माउंटेन मैन’ के नाम से भारत ही नहीं विदेशों में ख्यातिलब्ध रहे दशरथ मांझी का परिवार बदहाली के आंसू बहा रहा है। दशरथ ने अपनी पत्नी के प्रेम में पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना दिया था। पर्वत पुरुष के नाम पर अस्पताल और पक्की सड़क बनाई गईं, लेकिन उनका परिवार आर्थिक तंगी का दंश आज भी झेलने को विवश है।

प्रशासन के सारे दावे सिफर

‘द माउंटेन मैन’ दशरथ मांझी के परिवार के लिए जनप्रतिनिधि व प्रशासन द्वारा किए गए सारे दावे सिफर हैं, परिवार दाने-दाने को मोहताज है। परिवार को एक इंदिरा आवास तक आवंटित नहीं हुआ। पूरा परिवार फूस के मकान में रहता है। ‘द माउंटेन मैन’ की बेटी लौंगी देवी ने बताया कि पुत्र गया मांझी की पुत्री पिंकी कुमारी को अज्ञात बाइक सवार ने 10 जुलाई को धक्का मार दिया था। जिससे हाथ एवं एक पैर टूट गया। उसको इलाज की दरकार है। कहा, पैसे के अभाव में अच्छे चिकित्सक से इलाज नहीं करा पा रहे। आयुष्मान स्वास्थ्य कार्ड तक नहीं बना है। किसी तरह पुत्री को एक निजी चिकित्सक के यहां भर्ती कराया। जिस पर 40 हजार रुपए का खर्च आया है। इसमें 30 हजार रुपए कर्ज हो गया। सरकार से सहायता की गुहार लगाई पर नहीं मिली। दोनों बेटे लॉकडाउन के कारण घर पर बैठे हैं।

कुछ ने मदद को बढ़ाए हाथ

‘द माउंटेन मैन’ के पुत्र भागीरथ मांझी ने बताया कि पूर्व सांसद पप्पू यादव द्वारा कुछ वर्ष पूर्व एक लाख की मदद की गई थी। उसके बाद 10 हजार रुपए प्रति माह भेजते थे। वह भी एक वर्ष से बंद है। हालांकि बच्चे की बीमारी की सूचना उन्हें मिली तो कार्यकर्ताओं को भेजकर कुछ आर्थिक मदद की है। दशरथ मांझी के पुत्र भागीरथ मांझी को वृद्धापेंशन एवं पुत्री लौंगी देवी को विधवा पेंशन मिलती थी वह भी बंद कर दी गई है। उन्होंने कहा कि पिताजी के नाम पर फिल्म बनाई। फिल्म बनाते समय कहा गया था कि उचित राशि दी जाएगी जिसमें मात्र 50 हजार रुपए दिए गए। इस संबंध में नीमचक बथानी के अनुमंडल पदाधिकारी मनोज कुमार ने कहा कि दशरथ के परिवार के लोगों से मिलकर उन्हें कर्ज ली गई राशि के भुगतान का आश्वासन दिया गया है।

पत्नी के प्रेम में इसी पहाड़ को काटकर बीच से रास्ता बनाया था दशरथ मांझी ने जिन पर फिल्में भी बनीं,
पाई-पाई को मोहताज दशरथ मांझी का परिवार

द माउंटेन मैन के बेटे भगीरथ मांझी को वृद्धा पेंशन और बेटी को विधवा पेंशन का लाभ मिलता था जो वह भी बंद कर दिया गया है। परिवार ने बताया कि पिता पर फिल्म बनाने वाले बॉलीवुड फिल्म निर्देशकों ने फ़िल्म की दो प्रतिशत रॉयल्टी मिलने समेत कई वादे किए गए थे, मगर अभी तक कुछ भी नहीं मिला है। परिजन आज भी पहले की तरह फूस (घास) के बने घर में रहने को मजबूर हैं। मांझी के बेटे ने बताया कि हमलोग बहुत गरीब हैं। बच्ची का इलाज कर्ज लेकर कराया है मगर कितना कर्ज लेकर इलाज कराएं। बच्ची के इलाज के लिए हमलोगों के पास अब रुपया नहीं हैं।

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