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International Tribal Day : विश्व आदिवासी दिवस पर विशेष, जानिए क्या है ख़ास …

नई दिल्ली। विश्व आदिवासी दिवस (International Tribal Day) आज देशभर में मनाया जा रहा है। 1982 से हर साल 9 अगस्त को ये दिवस मनाया जाता है। 1982 में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) ने आदिवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए एक कार्यदल गठित किया था, जिसकी बैठक 9 अगस्त 1982 को हुई थी। उसी के बाद से संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) ने अपने सदस्य देशों में प्रतिवर्ष 9 अगस्त को ‘विश्व आदिवासी दिवस’के रुप में मनाने की घोषणा की।

केवल आदिवासियों के लिए नहीं वरन पूरे भारत के लिए ये दिवस अहम है। जिस कठिन स्थिति में रहक आदिवासी समुदाय के लोग अपना जीवनयापन करते हैं, उस बारे में सोचकर भी शायद आप हैरान रह जाएं। दुनिया भर में रहने वाले 37 करोड़ आदिवासी और जनजाति समुदायों के सामने जंगलों का कटना और उनकी पारंपरिक जमीन की चोरी सबसे बड़ी चुनौती है। वे धरती पर जैव विवधता वाले 80 प्रतिशत इलाके के संरक्षक हैं लेकिन बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लोभ, हथियारबंद विवाद और पर्यावरण संरक्षण संस्थानों की वजह से बहुत से समुदायों की आजीविका खतरे में है। ग्लोबल वॉर्मिंग का असर हालात को और खराब कर रहा है।

जनजातियां विभिन्न तरह की हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार वे 90 देशों में फैली हैं, 5,000 अलग-अलग संस्कृतियां और 4,000 विभिन्न भाषाएं। इस बहुलता के बावजूद या उसकी वजह से ही उन्होंने एक तरह के संघर्ष झेले हैं, चाहे वे ऑस्ट्रेलिया में रहते हों, जापान में या ब्राजील में, उनका जीवन दर कम है। गैर आदिवासी समुदायों की तुलना में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच कम है। उनकी आबादी दुनिया की 5 प्रतिशत है लेकिन गरीबों में उनका हिस्सा 15 प्रतिशत है।.

आदिवासियों की कुछ महत्वपूर्ण बातें

  • जब 21वीं सदी में संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) ने महसूस किया कि आदिवासी समाज उपेक्षा, बेरोजगारी एवं बंधुआ बाल मजदूरी जैसी समस्याओं से ग्रसित है, तभी इस समस्याओं को सुलझाने, आदिवासियों के मानवाधिकारों को लागू करने और उनके संरक्षण के लिए इस कार्यदल का गठन किया गया था। (UNWGIP)
  • आदिवासी शब्द दो शब्दों ‘आदि’ और ‘वासी’ से मिल कर बना है और इसका अर्थ मूल निवासी होता है।
  • भारत की जनसंख्या का 8.6% यानी कि लगभग (10 करोड़) जितना बड़ा एक हिस्सा आदिवासियों का है।
  • भारतीय संविधान में आदिवासियों के लिए ‘अनुसूचित जनजाति’ पद का इस्तेमाल किया गया है।
  • भारत के प्रमुख आदिवासी समुदायों में जाट, गोंड, मुंडा, खड़िया, हो, बोडो, भील, खासी, सहरिया, संथाल, मीणा, उरांव, परधान, बिरहोर, पारधी, आंध,टोकरे कोली, महादेव कोली,मल्हार कोली, टाकणकार आदि शामिल हैं।
  • आदिवासी समाज के लोग अपने धार्मिक स्‍थलों, खेतों, घरों आदि जगहों पर एक विशिष्‍ट प्रकार का झण्‍डा लगाते हैं, जो अन्‍य धर्मों के झण्‍डों से अलग होता है।
  • आदिवासी झण्‍डें में सूरज, चांद, तारे इत्‍यादी सभी प्रतीक विद्यमान होते हैं और ये झण्‍डे सभी रंग के हो सकते हैं। वो किसी रंग विशेष से बंधे हुये नहीं होते।
  • आदिवासी प्रकृति पूजक होते है। वे प्रकृति में पाए जाने वाले सभी जीव, जंतु, पर्वत, नदियां, नाले, खेत इन सभी की पूजा करते हैं। और उनका मानना है कि प्रकृति की हर एक वस्‍तु में जीवन होता है।

किस राज्य में कितने आदिवासी…

  1. छत्तीसगढ़ 32.45 प्रतिशत
  2. झारखंड 26.2 %
  3. पश्चिम बंगाल 5.49 %
  4. बिहार 0.99 %
  5. सिक्किम 33.08%
  6. मेघालय 86.01%
  7. त्रिपुरा 31.08 %
  8. मिजोरम 94.04 %
  9. मनीपुर 35.01 %
  10. नगालैंड 86.05 %
  11. असम 12.04 %
  12. अरूणाचल 68.08 %
  13. उत्तर प्रदेश 0.07 %
  14. हरियाणा 0.00 %

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