छत्तीसगढ़

किसान सभा ने तिवड़ा फसल को बीमा योजना में शामिल करने की मांग | news-forum.in

रायपुर | छत्तीसगढ़ किसान सभा ने रबी सीजन के अंतर्गत प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में तिवड़ा फसल को शामिल करने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने अगले तीन सालों के लिए बीमा योजना में इस फसल को अधिसूचित नहीं करने का निर्णय लिया है।

 

आज जारी एक बयान में छग किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की रबी फसलों में धान के बाद तिवड़ा ही सबसे बड़ी दलहनी फसल है, जिसका रकबा 3.5 लाख हेक्टेयर से ज्यादा है। इस फसल को बीमा योजना से बाहर रखने का कोई औचित्य समझ में नहीं आता। किसान सभा ने इसे कृषि विरोधी निर्णय बताया है।

किसान सभा नेताओं ने कहा है कि देश की जीडीपी में भारी ऋणात्मक गिरावट के बावजूद कृषि क्षेत्र ने प्रगति दर्ज की है। इस प्रगति को बनाये रखने के लिए किसानों द्वारा पैदा की जा रही हर फसल को बीमा के दायरे में लाना और उसका बाजार में समर्थन मूल्य सुनिश्चित करना जरूरी है। लेकिन केंद्र सरकार की कृषि विरोधी नीतियों के चलते खेती-किसानी संकट में है।

 

उन्होंने कहा कि एक ओर तो प्रदेश में धान की खेती को हतोत्साहित किया जा रहा है और बदले में तिवड़ा फसल के रकबे को बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है, वहीं दूसरी ओर इस फसल को बीमा सुरक्षा के दायरे से बाहर रखकर किसानों को कृषि-असुरक्षा में धकेला जा रहा है। केंद्र सरकार का यह कदम किसानों की आय दुगुनी करने के दावों के ठीक उलटा है।

किसान सभा ने कहा है कि तिवड़ा इस प्रदेश में गरीबों के लिए प्रोटीन प्राप्त करने का प्रमुख आहार है और पशु चारे के हिस्सा भी। लेकिन केंद्र सरकार की नीति गरीबों को खाद्य और पोषण सुरक्षा दिए जाने के ही खिलाफ है। यही कारण है कि इस फसल को सुरक्षा चक्र से बाहर रखा गया है। केंद्र सरकार के इस कदम से न केवल तिवड़ा की खेती करने वाले किसान हतोत्साहित होंगे, उनकी आजीविका असुरक्षित होगी।

 

किसान सभा ने इस फसल को बीमा योजना के दायरे में लाकर प्रीमियम घोषित करने की मांग की है, ताकि प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान की भरपाई के प्रति किसान समुदाय आश्वस्त हो सके। किसान सभा ने तिवड़ा का समर्थन मूल्य घोषित कर उसकी सरकारी खरीद की भी मांग की है।

 

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