जानें और सीखें

जानें और सीखें : क्या है ‘नेशलन हेल्थ आईडी’ जिसका पीएम मोदी ने किया ऐलान …

नई दिल्ली। भारत के 74 वें स्‍वतंत्रता दिवस के मौके पर 15 अगस्त 2020 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘वन नेशन वन राशनकार्ड’ की तर्ज पर ‘वन नेशन वन हेल्थ कार्ड’ की घोषणा की। इस योजना को लॉन्च करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज से भारत में एक और बहुत बड़ा अभियान शुरू होने जा रहा है। ये अभियान है नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन। इस मिशन के तहत हर भारतवासी की एक हेल्थ आईडी होगी। जब भी कोई भारतीय डॉक्टर या दवा की दुकान पर जाएगा तो हेल्थ आईडी में सभी जानकारी रहेगी। डॉक्टर के एपॉइंटमेंट से लेकर मेडिकेशन एडवाइस तक, सबकुछ आपकी हेल्थ प्रोफाइल पर उपलब्ध रहेगा।

 

क्या है Health ID Card योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रत्येक भारतवासी के लिए आज एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आईडी की घोषणा की। यह 2018 नीतीयोग में एक प्रस्ताव है। जिसके तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य स्टैक में प्रत्येक भाग लेने वाले उपयोगकर्ता की विशिष्ट पहचान करने के लिए एक केंद्रीकृत तंत्र बनाने का प्रस्ताव है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आईडी एक व्यक्ति के सभी स्वास्थ्य संबंधी जानकारी का भंडार होगा।

स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के अनुसार, प्रत्येक मरीज जो अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को डिजिटल रूप से रखना चाहते हैं, उन्हें हेल्थ आईडी बनवाना होगा। हेल्थ आईडी एक व्यक्ति के मूल विवरण और मोबाइल नंबर या आधार संख्या का उपयोग करके बनाई जाएगी।

हर वर्ग के लोगों के लिए

यह योजना राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में एक डिजिटल स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी के निर्माण की परिकल्पना है, जिसका उद्देश्य एक एकीकृत स्वास्थ्य सूचना प्रणाली विकसित करना है। जो सभी हितधारकों की जरूरतों को पूरा करे और सार्वजनिक और निजी स्वास्थ्य सेवा के साथ जुड़ाव के साथ दक्षता, पारदर्शिता और नागरिकों के अनुभव को बेहतर बनाए।

आम आदमी को क्या होगा फायदा, जानें

हर मरीज का पूरा मेडिकल डेटा रखने के लिए अस्पताल, क्लीनिक और डॉक्टर्स को एक सेंट्रल सर्वर से लिंक किया जाएगा। यानी इसमें अस्पताल, क्लीनिक और डॉक्टर भी रजिस्टर्ड होंगे। वैसे अभी सरकार इसे सबके लिए अनिवार्य नहीं करेगी। किन्तु उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इसे अनिवार्य कर दिया जाए। अगर कोई व्यक्ति किसी तरह का कैश ट्रांसफर स्कीम का लाभ उठाना चाहता है तो ही उसे अपनी हेल्थ आईडी को आधार कार्ड से लिंक करना होगा और अगर ऐसा नहीं है तो आधार कार्ड से लिंक करने की कोई जरुरत नहीं पड़ेगी।

ऐसे काम करेगी ये योजना

नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत एक यूनिक आईडी कार्ड यानी पहचान पत्र मिलेगा। ये आधार जैसा ही होगा। इसके जरिए किसी भी मरीज की निजी मेडिकल हिस्ट्री पता चल सकेगा। यानी अगर आप भारत के किसी भी कोने में इलाज के लिए जाएंगे तो आपको कोई जांच रिपोर्ट या पर्ची आदि नहीं ले जानी होगी, क्योंकि आपकी सारी जानकारी हेल्थ कार्ड में मौजूद होगी। डॉक्टर सिर्फ आपकी आईडी से ये जान सकेंगे कि आपको पहले कौन सी बीमारी रही है और आपका कहां पर क्या इलाज हुआ था।

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