मेरी रचना

हंसी आती है …

©राजकुमार बोहत, हरियाणा

 

 

हंसी आती है

तुम पर

पढ़कर अम्बेडकर को

जात -पात की

बात करते हो !

 

हंसी आती है

तुम पर

पास में अत्याचार

हो रहा और तुम

चुप रहते हो !

 

हंसी आती है

तुम पर

जब तुम आपस में ही

लड़ते हो !

 

हंसी आती है

तुम पर

जब एक-दूसरे की

मदद नहीं करते !

 

हंसी आती है

तुम पर

कोई आगे बढ़े

ओर तुम उसे

पीछे खींचते हो !

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