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अब आवाज से होगी कोरोना की जांच, महाराष्ट्र सरकार ने दी मंजूरी, इस एप्लीकेशन का होगा इस्तेमाल….

नई दिल्ली। भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या अब तक 21 लाख के आंकड़े को पार कर गई है। इस परिस्थिति से तेजी से निपटने के लिए कोरोना संक्रमित मरीजों की जांच में भी तेजी लानी होगी। भारत में महाराष्ट्र कोरोना संक्रमण के मामले में सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य है, जहां संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ऐसे में महाराष्ट्र सरकार ने कोरोना के खिलाफ जंग में एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत अब वॉयस (आवाज) सैंपल के जरिए कोरोना की जांच करवाई जाएगी। फिलहाल अभी इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जाएगा, बाद में ये पूरे महाराष्ट्र में लागू होगा।

RT-PCR रिजल्ट से होगी तुलना

गोरेगांव के एडिशनल नगर आयुक्त सुरेश काकानी ने कहा कि एक हफ्ते के अंदर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोरेगांव में एआई-आधारित वॉयस सैंपलिंग एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया जाएगा, जो कोरोना के संदिग्ध और कंफर्म केस पर प्रयोग होगा। उनके मुताबिक वॉयस सैंपल से मिले रिजल्ट की RT-PCR रिजल्ट से तुलना की जाएगी। अगर ये सफल रहा तो बीएमसी के अन्य अस्पतालों में इस सुविधा को शुरू कर दिया जाएगा। इससे रिजल्ट RT-PCR की तुलना में जल्दी मिलेंगे।

महाराष्ट्र में 5 लाख से ज्यादा मरीज

आपको बता दें कि भारत में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 21.68 लाख हो गई है, जिसमें से 43,585 की मौत हुई है, जबकि 14.89 लाख मरीज ठीक हुए हैं। मौजूदा वक्त में महाराष्ट्र कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां पर 5,03,084 मरीज सामने आए हैं। इसमें से 17,367 मरीजों की मौत हुई है जबकि 3,38,362 मरीज रिकवर हुए हैं। जिस वजह से अब वहां पर एक्टिव केस की संख्या 1.47 लाख है।

IIT की टीम करेगी मदद

बीएमसी ने जुड़े एक डॉक्टर ने कहा कि वॉयस सैंपल के आधार पर की गई जांच ज्यादा संवेदनशील नहीं है, इससे पॉजिटिव होने की संभावना ज्यादा रहेगी। वहीं बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक ये प्रोजेक्ट उनकी खुद की पहल है, जिसमें आईआईटी की एक टीम मदद करेगी। महाराष्ट्र के मंत्री आदित्य ठाकरे के मुताबिक बीएमसी AI बेस्ड वॉयस सैंपल से कोरोना की जांच के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर रही है। इसके साथ ही RT-PCR टेस्ट भी जारी रहेगा, लेकिन दुनियाभर में टेस्ट की गई तकनीकें साबित करती है कि महामारी ने हमें हमारे स्वास्थ्य ढांचे में तकनीक के उपयोग से चीजों को अलग तरह से देखने और विकसित करने में मदद की है।

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