संपादकीय

हमारे असली हीरो हैं मेडिकल सफाई कर्मचारी, नर्सें और पुलिस जवान ….

©डॉ. सत्यवान सौरभ, हरियाणा

 “ जब हर घर के दरवाजे बंद थे तो यही वो लोग थे जो आपकी पल-पल की खबर ले रहे थे, आपकी हर सहायता अपनी जान दांव पर लगाकर कर रहे थे, तो फिर आज जब इनको हमारी जरूरत है तो हम क्यों इनके लिए आगे नहीं आ रहे ? ”


बेशक समाज एवं सरकार के अलग-अलग पक्ष अपने-अपने धरातल पर कोरोना महामारी से जन-समाज को बचाने और वायरस पर अंकुश लगाने के लिए कर्त्तव्य-निष्ठा के साथ जुटे हुए हैं, परन्तु इस जंग में पहली कतार में बड़ी कुर्बानी देने वाले सफाई,  कर्मचारी नर्सें और पुलिस जवान शामिल हैं। इस समुदाय के कर्मचारी प्रारम्भ से ही कोरोना महामारी के विरुद्ध पूरी प्रतिबद्धता एवं निष्ठा के साथ संघर्षरत हैं। इसी कारण ये लोग कोरोना वायरस के सीधे निशाने पर रहते हैं, परन्तु कितने खेद और आश्चर्य की बात है कि सरकारी नीतियों और सत्ता-व्यवस्था के चाबुक का सबसे बड़ा शिकार भी आज इसी वर्ग को बनना पड़ रहा है। बेशक इस बात से इस वर्ग के प्रति प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इस व्यवस्साय से जुड़े लोगों की मानसिकता को आघात् पहुंचा है.

विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के माध्यम से अपने प्राणों के खतरे को साथ लेकर बुनियादी सेवाएं प्रदान करने वाले सचमुच ये योद्धा कार्यकर्ता देश की सामाजिक कल्याण प्रणाली की रीढ़ हैं। मगर इनके लिए उन शर्तों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता है, जिनके तहत वे काम करते हैं। प्रशासनिक उपेक्षा के कारण इस व्यवस्साय से जुड़े लोगों की मानसिकता को आघात् पहुंचा है, परन्तु सर्वोच्च न्यायालय की टिप्पणी ने जहां इस समुदाय के लोगों को ढांढ़स बंधाया है, वहीं सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय इन लोगों की निष्ठा, प्रतिबद्धता और इनके शौर्य को मान्यता भी प्रदान करता है।

ये फ्रंटलाइन सरकारी कर्मचारी विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक सेवा वितरण के सच्चे कार्यान्वयनकर्ता हैं। वे जमीनी स्तर पर काम करते हैं, इस प्रकार नागरिकों की बेहतर आवश्यकताओं के बारे में जानते हैं, जिससे एक प्राथमिक फीड-बैक कलेक्टर और सहायक के रूप में कार्य किया जाता है। मगर हैरानी की बात है कि अपनी जान पर खेलकर लोगों कि जान बचाने वाले इन योद्धा कार्यकर्ताओं के कार्यों को इनकी ड्यूटी का हिस्सा मानकर शून्य कर दिया जाता है, कोरोना के विरुद्ध जंग में जिस वर्ग की भूमिका और दायित्वशीलता सर्वाधिक अहम् रही है, उनको आज हमारी व्यवस्था अपने निशाने पर ले रही है। कहाँ तो इनको अग्रिम कतार के योद्धा होने के कारण अतिरिक्त सुविधाएं दी जानी चाहिएं थी , और कहां ये कोरोना संक्रमित हो जाने पर आज अपनी जान बचाने को तरस रहे है, सबकी जान बचाने वालों की खुद की जान खतरे में है, यदि इन में से किसी सदस्य को एकांतवास अथवा क्वारैंटाइन में जाना पड़ा है, तो इन दिनों का उसका वेतन ही काट लिया जा रहा है, कहीं-कहीं पर तो इनको महीनों का वेतन भी नहीं मिला है।

सफाई कर्मचारी, नर्से और पुलिस आज काम के घंटों और वेतन आदि की समस्याओं से त्रस्त हैं। नर्सों का वेतन तो फिर भी थोड़ा अच्छा है लेकिन देशभर में पुलिस और सफाई कर्मचारियों को इतना वेतन नहीं दिया जाता है जिसके वे हकदार है। दूसरा इनके ड्यूटी के घण्टे इतने मुश्किल होती है कि उनके मुताबिक इनको वो सुविधाएं नहीं मिल रही हैं जिससे ये अपने काम को आसान कर सके। बड़े अफसरों का दबाव इनके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर कर रहा है, अफसरों के जुबानी आदेशों को इनको हर हाल में पूरा करना पड़ता है। इन वर्ग के लोगों की संतुष्टि के लिए देश और समाज को प्रत्येक सम्भव उपाय करना आज बहुत ज़रूरी है।

सुरक्षित कार्य वातावरण की कमी उन्हें संवेदनशील बनाती है। फ्रंटलाइन वर्कर्स के सामने आने वाले ऐसे मुद्दों के प्रभाव के परिणामस्वरूप आज इनका मनोबल कम होता जा रहा है। इनको ऐसा लगने लगा है कि इनके कार्यों को समाज में उस तरिके से नहीं देखा रहा है जिस भावना से इन्होने अपने कार्यों को अंजाम दिया है। देश के कई भागों में लोगों की इनके प्रति हेय दृष्टि से इन बातों को सच साबित कर दिया। कोरोना के प्रति लापरवाह होते भारत में ये बिना समुचित किटों एवं अन्य उपकरणों के अभाव में बड़ी जीवटता के साथ अपने रण-मोर्चे पर डटे हुए हैं। आज भी हमारे ये सफाई कर्मी, स्वास्थ्य कर्मी, पुलिसकर्मी  लोगों की जान बंचाने के लिए खुद को जोखिम में डाल रहे हैं और सामने आकर लोगों की मदद कर रहे हैं। ये सब हमारी कोरोना के विरूद्ध जंग के हीरो हैं।

हाल ही में सुप्रीम कोर्ट का कोरोना के इन योद्धा की दुर्दशाओं पर बोलना कोई छोटी बात नहीं है। सुप्रीम कोर्ट का दखल बताता है कि हमने इनके कार्यों को मन से नहीं सराहा और न ही सरकारों और प्रशासन से उनकी बुनियादी बातें सुनकर उनका समाधान करने की कोश्शि की है, जो बेहद गंभीर विषय है। हमें इनके वास्तविक योगदान को पहचान कर इनके मनोबल को मजबूत करने की गहन आवश्यकता है। हमें ये मान लेना होगा कि आज इन्ही कि वजह से हम है। ये मात्र वेतनभोगी निचले स्तर के कर्मचारी भर नहीं है, ये हमारे वो हीरो हैं जिनकी वजह से हमारी जानें बचीं हैं, इनके अहसानों को मात्र दुगुना वेतन देने से चुकता नहीं किया जा सकता।

जब हर घर के दरवाजे बंद थे तो यही वो लोग थे जो आपकी पल-पल की खबर ले रहे थे। आपकी हर सहायता अपनी जान दांव पर लगाकर कर रहे थे, तो फिर आज जब इनको हमारी जरूरत है तो हम क्यों इनके लिए आगे नहीं आ रहे ? लोगों के साथ-साथ सरकार और प्रशासन को इनके वास्तिक कार्य की सराहना करनी चाहिए और उसकी एवज में इनके कद को भी बढ़ाना चाहिए। अफसरों को इनकी हर सुविधा का ध्यान रखना चाहिए। आखिर उनकी लाज बचाने वाले और सरकारी नीति को धरातल पर ले जाकर सफल करने वाले यही लोग है, सही समय पर वेतन और बढ़ोतरी, एवं समाज में उनकी छवि को उचित स्थान दिलाना किसी भी व्यवस्था की अहम जिम्मेदारी बनती है, अन्यथा उस व्यवस्था को ढहने में देर नहीं लगती।


Our real heroes are medical scavengers, nurses and police personnel …

 

(When the doors of every house were closed, these were the people who were taking the news of you from moment to moment, we’re putting all your help at stake, then when today they need us, why should Not we coming forward them ?)

©Priyanka Saurabh

Of course, different sides of society and government are busy on their ground with the duty to save the people from the corona epidemic and to curb the virus, but in this war, the first queuing nurses, Police constables, and medical scavengers. The employees of this community have been struggling with complete commitment and loyalty against the corona epidemic since the beginning. That is why these people live directly under the target of the Coronavirus, but how sorry and surprising that this class is also becoming the biggest victim of the whips of government policies and power systems. Of course, due to administrative neglect towards this class, the mentality of the people associated with this business has been affected.

These warrior activists who provide basic services along with the threat of their lives through various government programs are the backbone of the social welfare system of the country. But these do not pay enough attention to the conditions under which they operate. Due to administrative neglect, the mentality of the people associated with this business has been affected, but while the comment of the Supreme Court has given a big boost to the people of this community, the decision of the Supreme Court also gave recognition to the loyalty, commitment and valor of these people. Does.

These frontline government employees are true implementers of various welfare schemes and public service delivery. They operate at the grassroots, thus becoming aware of the better needs of citizens, thereby acting as a primary feed-back collector and assistant. But surprisingly, the actions of these warrior activists who save their lives by playing on their lives are reduced to zero as part of their duty, the class whose role and responsibility has been most important in the war against Corona, today Our system is taking its target. Where they should have been given additional facilities due to being warriors of the front line, and where they are trying to save their lives today when the corona gets infected, the lives of all those who save their lives are in danger, if any of them If a member has to go to seclusion or quarantine, then his salary is being deducted these days, at some places he has not even got the salary of months.

Nurses, police, and sanitation workers today are plagued with problems of working hours and wages. The salary of nurses is still a bit good, but the police and sanitation workers are not given the salary that they are entitled to throughout the country. Second, their hours of duty are so difficult that according to them they are not getting the facilities so that they can make their work easier. The pressure of senior officers is adversely affecting their mental health, they have to fulfill the orders of the officers. Today it is very important for the country and society to take all possible measures for the satisfaction of these people.

The lack of a safe working environment makes them sensitive. Today, as a result of the impact of such issues facing the frontline workers, their morale is getting reduced. They have started feeling that their actions are not being seen in society in the way in which they have done their work. In many parts of the country, people proved these things to be true to him. In Hindustan, being careless towards Corona, they are standing on their battlefront with great liveliness in the absence of proper kits and other equipment. Even today, our health workers, policemen, sanitation workers are putting themselves at risk to save the lives of people and come forward and help people. These are the heroes of the war against our corona.

Recently, the Supreme Court is not a small thing to speak on the plight of these warriors of Corona. The intervention of the Supreme Court states that we have not appreciated their actions by heart, nor have tried to solve them by listening to their basics from the governments and administration, which is a very serious matter. We need to recognize their real contribution and strengthen their morale. We have to accept that today we are the reason for this. This amount is not a salaried lower employee, it is our heroes who have saved us due to this, their gratitude cannot be paid only by paying double the salary.

When the doors of every house were closed, these were the people who were taking the news of you from moment to moment. They were putting their lives at stake, then today when they need us then why don’t we go-ahead for them? Coming to The people as well as the government and administration should appreciate their actual work and in return, their stature should also be increased. Officers should take care of their every facility. After all, it is these people who save their honor and succeed by taking the government policy to the ground, pay and increase at the right time, and to give proper place to their image in the society, it becomes an important responsibility of any system, otherwise, that system collapses I do not take long

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