छत्तीसगढ़

पहाड़ की बेटी बनेगी छत्तीसगढ़ की पहली लिपिक | news-forum.in

कोरबा | संरक्षित आदिवासी समाज और पहाड़ की बेटी राजकुमारी छत्तीसगढ़ की पहली ऐसी लिपिक बनने जा रही है जो पहाड़ी कोरवा समुदाय की है। इस बेटी ने 12वीं के बाद कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा की योग्यता के बूते विशेष पिछड़ी जनजाति के लिए कलेक्टोरेट से जारी पद के लिए पात्रता हासिल की है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र कहे जाने वाले विशेष संरक्षित जनजाति में शामिल जिले के मूल बाशिंदे पहाड़ी कोरवा समुदाय की बेटियों की भी अब सरकारी नौकारियों में भी भागीदारी होने जा रही है। राज्य शासन के निर्देश पर जिला कार्यालय से चल रही भर्ती प्रक्रिया में राजकुमारी को पहली प्राथमिकता मिलेगी। गढ़उपरोड़ा पंचायत के कदझेरिया गांव की राजकुमारी ने 12वीं पास होने के साथ कंप्यूटर एप्लीकेशन में डिप्लोमा प्राप्त कर यह पात्रता हासिल की और जल्द ही वह शासकीय सेवा में लिपिक पद पर चुनी जाने वाली प्रदेश की पहली व एकमात्र पहाड़ी कोरवा बेटी होगी। राजकुमारी के पिता नहीं हैं, जबकि पांच बहनों में वही आठवीं से ज्यादा पढ़ सकी।

 

 

पढ़ने की ललक व कुछ कर दिखाने की चाहत

राजकुमारी ने पढ़ने की ललक व कुछ कर दिखाने की चाहत में न केवल अपनी योग्यता साबित की, बल्कि शासकीय सेवा में चयनित होने पर वह कोरवा समुदाय को विकास की मुख्यधारा में लाने ‘मील का पत्थर’ बनने जा रही है। उसकी कामयाबी को देखते हुए प्रदेश की अन्य संरक्षित जनजातियों की भी उन्नति का मार्ग प्रशस्त होगा।

 

2019 को जारी की गई थी वेकेंसी

छत्तीसगढ़ शासन, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग रायपुर के आदेश पर जिला मुख्यालय में 23 नवंबर 2019 को विशेष पिछड़ी जनजाति के अभ्यर्थियों के लिए सहायक ग्रेड-तीन के तीन पद की वेकेंसी जारी की गई थी। पद के लिए 12वीं पास के साथ कंप्यूटर कोर्स अनिवार्य था। इस पद के लिए योग्यता साबित करते हुए पहाड़ी कोरवा युवती राजकुमारी सिंह ने वह कमाल कर दिखाया है, जो उससे पहले प्रदेश में किसी और संरक्षित जनजाति ने नहीं किया था।

 

सबने अंगूठा लगाया, उसने अंग्रेजी में किए हस्ताक्षर

कार्यालय परियोजना प्रशासक के लिपिक राकेश पैकरा ने बताया कि एक बार वे एलईडी बल्ब वितरण करने पूर्व परियोजना प्रशासक एके गढ़ेवाल के साथ दौरे पर कदझेरिया पहुंचे। गांव में राजकुमारी भी अपने घर के लिए बल्ब लेने पहुंची। हमने देखा कि वहां सभी बल्ब रिसीव कर अंगूठा लगा रहे थे और यह पहाड़ी कोरवा बालिका ने अंग्रेजी में हस्ताक्षर किए। उससे पूछा तो बताया कि 12वीं पास है, आगे भी पढ़ना चाहती है। पैकरा ने ही उसे लिपिक पद के लिए आवेदन भराया। कंप्यूटर योग्यता के अभाव में चयन नहीं हुआ। तब उसे आर्थिक मदद प्रदान कर एमएलसी कंप्यूटर संस्था से डीसीए का कोर्स करा फिर से आवेदन दिया और उसे पात्रता मिल गई।

 

वित्त विभाग की अनुमति का इंतजार

कलेक्टोरेट के लिए राज्यपाल की अनुशंसा से दो पद विशेष रूप से वेकेंसी जारी की गई थी। इन पदों पर केवल विशेष पिछड़ी आदिम जातियों की ही भर्ती की जानी है, जिनमें पहाड़ी कोरवा व बिरहोर आदिवासी शामिल हैं। इस बीच वित्त विभाग से एक निर्देश जारी हुआ, जिसमें बिना वित्त विभाग की अनुमति के कोई भी भर्ती न करने के आदेश दिए गए थे। इस निर्देश के परिपालन में भर्ती व नियुक्ति की अनुमति के लिए कलेक्टोरेट की ओर से वित्त विभाग को लिखा गया है। अनुमति प्राप्त होते ही राजकुमारी की नियुक्ति हो जाएगी।

 

बरतराम भी नियुक्त होगा

राजकुमारी की तरह ही ग्राम पंचायत गेरांव के आश्रित गांव बांसाखर्रा के बरतराम बिरहोर ने भी लिपिक के दो में से एक पद के लिए पात्रता हासिल की है। उसने भी 12वीं पास करने के बाद राजकुमारी की तरह कंप्यूटर एप्लीकेशन में एक साल का डिप्लोमा पाठ्यक्रम (डीसीए) पूरा किया है। विशेष जनजाति के लिए जारी लिपिक के दो पद में एक पर बरतराम भी नियुक्त होगा, जिसके लिए भी वित्त विभाग से अनुमति की मांग करते हुए जिला प्रशासन की ओर से मुख्यालय को लिखा गया है। बरतराम पहला बिरहोर होगा, जो लिपिक बनेगा।

 

एक महिला समेत 13 ग्रेड-चार में

जिले की बात करें तो यहां संरक्षित जनजातियों की आबादी पहाड़ी कोरवा और बिरहोर समेत करीब 2,700 है। इनमें अब 13 पहाड़ी कोरवा आदिवासी जिले के स्कूलों व विभिन्न विभागीय कार्यालयों में सहायक ग्रेड-चार के पद पर शासकीय सेवा दे रहे हैं। इनमें एक पहाड़ी कोरवा युवती भी शामिल है, जो पहाड़ पर स्थित ग्राम छतासरई की रहने वाली है और हाईस्कूल अजगरबहार में कार्यरत है।

 

257 पहाड़ी कोरवा 12वीं तक शिक्षित

जिले में नौकरी मिलने की चाह में 257 पहाड़ी कोरवा 5वीं से लेकर 12वीं तक की शिक्षा पूरी कर चुके हैं लेकिन इन पहाड़ी कोरवाओं को उस अनुपात में शासकीय सेवाओं में नियोजित नहीं किया जा सका है। स्कूल आश्रम छात्रावासों में लंबे अर्से से भर्ती नहीं होने की वजह से कई पहाड़ी कोरवा परिवार मायूस भी हैं। कायदे से चतुर्थी श्रेणी के पदों के लिए विज्ञापन जारी कर पहाड़ी कोरवाओं को योग्यतानुसार शासकीय सेवाओं में स्थान देना चाहिए।

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