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रिपोर्ट में दावा, बेबी बूम की कोई संभावना नहीं: दुनिया में कोरोना के असर से 50% तक घटेगी जन्म दर

नई दिल्ली। कोरोना का शुरुआती दौरा मार्च-अप्रैल में लॉकडाउन के साथ यूनिसेफ समेत तमाम एजेंसियों ने अनुमान लगाया था कि दुनिया में जन्म दर बढ़ेगी और अगले साथ आबादी पर इसका असर दिखेगा। हालांकि मई-जून और जुलाई में कोरोना के बढ़ते कहर के साथ  अमेरिका, यूरोप और तमाम एशियाई देशों में जन्म दर में 30 से 50 फीसदी तक कमी का अनुमान लगाया गया है। लंदन स्कूल ऑफ एकोनॉमिक्स के सर्वेक्षण के अनुसार कोरोना काल जनसंख्या में उछाल के बजाए गिरावट का कारण बनेगा। यूरोपीय देश इटली, जर्मनी, फ्रांस, स्पेन और ब्रिटेन की बात करें तो 18 से 34 साल की उम्र के 50 से 60 फीसदी युवाओं ने परिवार आगे बढाने की योजना को एक साल के लिए टाल दिया है।

रिपोर्ट की लेखिका फ्रांसेको लुपी ने कहा कि फिजिकल  डिस्टेंसिंग और तमाम पाबंदियों के बीच बेबी बूम की कोई संभावना नहीं। सर्वे में फ्रांस और जर्मनी में 50 फीसदी युवा दंपतियों ने कहा कि वे परिवार आगे बढ़ाने के बारे में फिलहाल सोचेंगे भी नहीं। सिर्फ 23 फीसदी ने इससे अंतर न पड़ने की बात कही। इटली में 38 फीसदी और स्पेन में 50 फीसदी से ज्यादा युवाओं ने कहा कि उनकी आर्थिक और मानसिक स्थिति अभी ऐसी नहीं है कि वे बच्चे का ख्याल रख पाएंगे।

देश में कोरोना के कुल संक्रमितों की संख्या 8 लाख के बेहद करीब पहुंच गई है। इस बीच सरकार ने कहा है कि वह इस संख्या को लेकर चिंता में नहीं है। स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने शुक्रवार को कहा कि देश में करोना रिकवरी दर अधिक है और मृत्यु दर बेहद कम इसलिए केसों की संख्या से चिंता नहीं है। उन्होंने फिर दोहराया कि देश में अभी कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा, ”कोविड-19 के मरीजों की रिकवरी दर 63 फीसदी है और मृत्यु दर महज 2.72 फीसदी। हम केसों की संख्या को लेकर चिंतित नहीं हैं। हम टेस्टिंग बढ़ा रहे हैं ताकि अधिकतर केसों को पहचान हो सके और उनका इलाज हो सके। करीब 2.7 लाख टेस्ट प्रतिदिन हो रहे हैं।”

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