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गांव की तीन बहनें पहले बनीं वॉलीबाल की नेशनल खिलाड़ी, फिर तीनों की लगी सरकारी नौकरी | news-forum

झुंझुनूं | आधी आबादी का पूरा सच है कि ये कोमल है पर कमजोर नहीं। इन्हें भी पढ़ने-लिखने और आगे बढ़ने का भरपूर मौका मिले तो ये भी कमाल करके दिखा सकती हैं। इस बात जीता जागता उदाहरण है राजस्थान के झुंझुनूं जिले के गुढ़गौड़जी इलाके के गांव गिलों की ढाणी के पूर्व जिला उप प्रमुख विद्याधर गिल की तीन बेटियां।

 

एक बहन सीआइडी में इंस्पेक्टर

झुंझुनूं में सीआइडी (इंटेलीजेंस) में इंस्पेक्टर मनेष गिल ने वन इंडिया हिंदी से बातचीत में अपने परिजनों द्वारा बहनों को पढ़ने-लिखने का भरपूर अवसर देने, वॉलीबाल की नेशनल खिलाड़ी बनने और फिर तीनों ने सरकारी नौकरी में आने तक के सफर के बारे में बताया।

 

लोग कहते थे इनकी पढ़ाई छुड़वा दो

मनेष गिल ने बताया कि तीन बेटियां पैदा होने के बाद मां पुष्पा देवी के सामने समस्या यह थी कि वह बेटियों की परवरिश करे या खेती बाड़ी करें। यहां तक लोग तो ये भी कहने लगे थे बड़ी बेटियों की पढ़ाई छुड़वा दो ताकि ये छोटी बहन की देखभाल कर सकते और मां का खेत में हाथ बंटा सके।

 

सरकारी स्कूल में पढ़कर हुईं सफल

उस स्थिति में पुष्पा देवी और विद्याधर गिल ने बेटियों की पढ़ाई जारी रखी। उन्होंने तीनों को सरकारी स्कूल में पढ़ाया। पढ़ाई के दौरान ही तीनों बहनें ने वॉलीबाल भी खेलना शुरू किया और देखते ही देखते तीनों बहन नेशनल लेवल की खिलाड़ी बन गई। फिर तीनों बहनें सरकारी नौकरी भी लगी।

 

यहां कार्यरत हैं तीनों बहन

 

  1. राजकुमारी गिल

शिक्षिका राजकीय विद्यालय बाकरा मोड़

  1. मनेष गिल

सीआइडी (इंटेलीजेंस) में इंस्पेक्टर

  1. किरण गिल

शिक्षिका राजकीय विद्यालय बड़गांव

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