देश-विदेश

क्या होती है क्रिप्टोकरेंसी Bitcoin, जिसकी मांग कर रहा था ट्विटर अकाउंट हैक करने वाला, पढ़ें विस्तृत खबर …

नई दिल्ली। हैकरों ने दुनिया के दिग्गज नेताओं, सेलेब्रिटी, मशहूर कारोबारी और कंपनियों के ट्विटर अकाउंट को हैक कर लिया. बुधवार को हैकरों ने जिनके ट्विटर अकाउंट को हैक किया उनसे बिटकॉइन की मांग. आइए जानते हैं कि आखिर क्या है बिटकॉइन और यह क्यों चर्चा में रहता है?

  क्या है बिटकॉइन  

असल में बिटकॉइन (Bitcoin) एक क्रिप्टोकरेंसी है. इसे सातोशी नकामोति ने 2008 में बनाया था. हालांकि आजतक यह नहीं पता चल पाया है कि सातोशी नकामोति कौन है? कोई इंसान है या संस्था? कहां का है? इसे पहली बार 2009 में ओपन सोर्स सॉफ्टवेयर के रूप में जारी किया गया था. इसको कोई बैंक या सरकार कंट्रोल नहीं करती है. भारत में रिजर्व बैंक ने इसे मान्यता नहीं दी है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने वर्चुअल करेंसी के माध्यम से क्रिप्टोकरेंसी में लेन देन की इजाज़त दे दी है. यानी भारत में भी बिटकॉइन की खरीद-फरोख्त हो सकती है.

  क्या होती है क्रिप्टो करेंसी  

क्रिप्टो का मतलब ऐसी चीज जो रियल न हो. क्रिप्टो करेंसी एक ऐसी मुद्रा है जो कंप्यूटर एल्गोरिद्म पर बनी होती है. यह सिर्फ इंटरनेट और कंप्यूटर पर उपलब्ध होती है. यह एक स्वतंत्र मुद्रा है, जिसका कोई मालिक नहीं होता. यह करेंसी किसी भी एक अथॉरिटी के काबू में भी नहीं होती. डिजिटल या क्रिप्टो करेंसी इंटरनेट पर चलने वाली एक वर्चुअल करेंसी हैं. बिटकॉइन के अलावा दुनिया में सैकड़ों अन्य क्रिप्टो करेंसी भी मौजूद हैं जैसे- रेड कॉइन, सिया कॉइन, सिस्कॉइन, वॉइस कॉइन और मोनरो.

क्रिप्टोकरेंसी में रिटर्न यानी मुनाफा काफ़ी अधिक होता है, ऑनलाइन खरीदारी से लेन-देन आसान होता है. क्रिप्टो करेंसी के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है, इसलिए नोटबंदी या करेंसी के अवमूल्यन जैसी स्थितियों का इस पर कोई असर नहीं पड़ता.

साल 2009 में जब बिटकॉइन को लांच किया गया था तब उसकी वैल्यू 0 डॉलर थी. 2010 में भी इसकी वैल्यू 1 डॉलर तक नहीं पहुंची. लेकिन आज बिटकॉइन का रेट हजारों डॉलर में पहुंच गया है.

  कैसे होता है बिटकॉइन से लेनदेन  

बिटकॉइन (Bitcoin) के लेनदेन का एक लेज़र बनाया जाता है. दुनिया में लाखों व्यापारी भी बिटकॉइन से लेनदेन करते हैं. हालांकि किसी भी केंद्रीय बैंक ने अभी इसको मान्यता नहीं दी है. अमेरिका की कई दिग्गज कंपनियां भी बिटकॉइन को स्वीकार करती हैं. इंटरनेट की दुनिया में इसकी खरीद-फरोख्त कराने वाले कई एक्सचेंज हैं. इंटरनेट की कई वेबसाइट और ऐप के माध्यम से इसकी खरीद-फरोख्त होती है. इसमें खरीद-फरोख्त करने वालों की जानकारी छुपी रहती है.

  भारी उतार-चढ़ाव और जोखिम  

क्रिप्टो करेंसी के कई फ़ायदे भी हैं. पहला और सबसे बड़ा फ़ायदा तो ये है कि डिजिटल करेंसी है, जिससे इसके गायब होने या चोरी होने का खतरा नहीं होता.बिटकॉइन में निवेश से लोगों को भारी मुनाफा होता है, लेकिन इसमें काफी उतार-चढ़ाव होता है, इसलिए जोखिम भी बहुत ज्यादा है.

कई बार एक ही दिन में बिटक्वाइन बिना किसी चेतावनी के 40 से 50 फीसदी गिर गया. 2013 के अप्रैल में बिटकॉइन की कीमत एक ही रात में 70 फीसदी से गिरकर 233 डॉलर से 67 डॉलर पर आ गई थी.

इसका सबसे बड़ा नुक़सान तो यही है कि ये वर्चुअल करेंसी है और यही इसे जोखिम भरा सौदा बनाता है. इस करेंसी का इस्तेमाल ड्रग्स सप्लाई और हथियारों की अवैध खरीद-फरोख्त जैसे अवैध कामों के लिए किया जाने का डर भी रहता है. इस पर साइबर हमले का खतरा भी हमेशा बना रहता है.

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
Close