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प्रेगनेंसी में क्योंल सताता है पसली का दर्द, जानें कारण और इलाज यहां जानें और सीखे में | news-forum.in

महिलाओं को प्रेगनेंसी के दौरान कई तरह के लक्षणों और समस्‍याओं को झेलना पड़ता है। इनमें से एक है पसलियों में दर्द होना। प्रेगनेंसी की हर तिमाही में अलग अलग कारणों से पसलियों में दर्द हो सकता है। अधिकतर मामलों में पसली में दर्द होना कोई नुकसान नहीं पहुंचाता है। गर्भाशय में भ्रूण के बढ़ने के कारण अक्‍सर पसलियों के आसपास दर्द और ऐंठन महसूस होती है। बहुत कम ही ऐसा होता है जब किसी स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍या के कारण पसली में दर्द होता हो इसलिए जरूरी है कि आप इसके संकेतों को नजरअंदाज न करें।

 

 

प्रेगनेंसी में दर्द होने के कारण

प्रेगनेंसी की हर तिमाही में अलग कारणों से पसली में दर्द होता है। गर्भावस्‍था के आखिरी महीनों और प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में गर्भाशय ऊपर की ओर फैलने लगता है ताकि शिशु को पर्याप्‍त जगह मिल सके। जैसे-जैसे भ्रूण का आकार बढ़ता है, वैसे वैसे पसलियों पर दबाव पड़ना शुरू हो सकता है। शिशु के भार का प्रभाव पेट की आसपास की मांसपेशियों पर भी पड़ता है जिससे पसलियों की मांसपेशियों पर दबाव आता है और मांसपेशियों में दर्द शुरू होता है।

 

 

राउंड लिगामेंट पेन

गर्भवती महिलाओं को अक्‍सर राउंड लिगामेंट पेन की शिकायत रहती है। ग्रोइन हिस्‍से से गर्भाशय के सामने वाले हिस्‍से को जोड़ने वाले फाइब्रस टिश्‍यू कॉर्ड के जोड़े को राउंड लिगामेंट कहा जाता है। प्रेगनेंसी में गर्भाशय के बढ़ने के साथ ही राउंड लिगामेंट पर भी दबाव पड़ सकता है और इसमें चलने पर तेज दर्द हो सकता है।प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही शुरू होने पर कभी भी राउंड लिगामेंट पेन हो सकता है। इसमें पसलियों, कमर और पेल्विस में दर्द महसूस हो सकता है।

 

 

मूत्र मार्ग में संक्रमण

प्रेगनेंसी खासतौर पर गर्भावस्‍था की तीसरी तिमाही में यूटीआई का खतरा रहता है। प्रेगनेंसी में मूत्र मार्ग में मौजूद बैक्‍टीरिया में बदलाव आ सकता है और इस पर भ्रूण के दबाव के कारण पेशाब करने में दिक्‍कत हो सकती है। यदि इलाज न किया जाए तो किडनी में दर्द हो सकता है जो कि पसली में दर्द जैसा महसूस हो सकता है। पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना, पेशाब की मात्रा कम होना, बुखार या ठंड लगना और मूत्राशय या किडनी के आसपास दर्द हो तो डॉक्‍टर को जरूर दिखाएं।

 

 

पथरी होने का खतरा

गर्भवती महिलाओं में पथरी का अत्‍यधिक खतरा होता है। एस्‍ट्रोजन लेवल बढ़ने और मूत्राशय को पूरी तरह से खाली न कर पाने की वजह से पथरी बनती है। एक अध्‍ययन के मुताबिक, लगभग 12 फीसदी महिलाएं पथरी की समस्‍या से ग्रस्‍त होती हैं। इसमें लक्षण दिख भी सकते हैं और नहीं। इसमें पेट के ऊपर दाएं हिस्‍से में तेज दर्द उठता है। गर्भावस्‍था में कभी भी पथरी हो सकती है। कुछ महिलाओं को प्रेगनेंसी के बाद पथरी निकालने के लिए सर्जरी करवानी पड़ सकती है।

 

 

दर्द के अन्‍य कारण

इसके अलावा प्रीक्‍लैंप्‍सिया, HELLP सिंड्रोम के कारण प्रेगनेंसी की दूसरी तिमाही में पसली में दर्द हो सकता है। कब्‍ज और सीने में जलन भी पसलियों में दर्द का कारण बन सकती है।

 

 

पसली में दर्द का इलाज

शिशु के पसली पर लात मारने या दबाव बनने पर पसली में उठने वाले दर्द को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में गर्म पानी से नहाने और दर्द निवारक दवाओं की मदद ली जा सकती है। हल्‍के व्‍यायाम से भी दर्द से छुटकारा मिल सकता है। पसली में दर्द के कारण के आधार पर ही उसका इलाज निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी महिला को यूटीआई की वजह से पसली में दर्द हो रहा है तो उसे एंटीबायोटिक दी जाएगी। पथरी होने पर डिलीवरी के बाद सर्जरी से पथरी को निकाला जाएगा।

 

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